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ब्रिगेडियर विद्याधर जुयाल संस्कृत विद्यालय भुवनेश्वरी सिद्धपीठ सितोनस्यूं पौड़ी गढ़वाल का इतिहास
बहुत सारी समस्याओं के कारण सन् 1995 में विद्यालय को ब्रिगेडियर साहब के पैतृक गांव झाँजड़ ले जाना पड़ा, उस समय तक विद्यालय में नवीन जुयाल व अनसूया प्रसाद जी का आगमन हो चुका था अतः इन दोनों व्यक्तियों ने रात दिन मेहनत की जिसके परिणाम स्वरूप विद्यालय से योग्य छात्र निकलने लगे।इस बीच भुवनेश्वरी में जल व विद्युत व्यवस्था कर ली गयी व सन्2005 में पुनः विद्यालय को भुवनेश्वरी मन्दिर में स्थानांतरित कर दिया गया। देखते ही देखते विद्यालय की प्रसिद्धि चारों तरफ होने लगी।किन्तु विद्यालय में बहुत सारे संसाधनों की कमी निरन्तर बनी रही किन्तु इस बीच श्री अरविंद जी व जयदीप जी की प्रेरणा से बहुत सारे लोग विद्यालय के संपर्क में आये और विद्यालय में तेजी से संसाधन जुटाने में संलग्न हो गये , इन सहयोग कर्ताओं में नवदीप जी, राजीव जी, कमल बधवा जी व इन सबके मित्र व रिश्तेदार सम्मिलित हैं। आज विद्यालय 9 शिक्षक व 4 अन्य अन्य कर्म भी कार्यरत हैं।विद्यालय में संसाधनों के जुड़ने व पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था के कारण ही एक ओर जहां अन्य विद्यालयों में छात्रों का अभाव बना हुआ है वहीं दूसरी ओर हमारे विद्यालय में इस वर्ष ही अब तक 42 छात्रों का नया प्रवेश हो चुका है।तथा और प्रवेश के लिए मना कर दिया गया है। ये सब माँ भुवनेश्वरी की कृपा और हमारे सहयोग करने वाले महानुभावों व विद्यालय के शिक्षकों के प्रयासों का फल है। आज विद्यालय उत्तराखण्ड के संस्कृत विद्यालयों में एक आदर्श विद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है। यह विद्यालय और तीव्र गति से आगे बढ़े इसके लिए हम सबको और अधिक शक्ति से जुटना होगा।